रस्म ए उल्फत को निभाएं तो निभाएं कैसे,
हर तरफ आग है दामन को बचाएं कैसे,
बोझ होता जो ग़मों का तो उठा भी लेते
जिंदगी ही बोझ है तो इस बोझ को उठाएं कैसे....
I MISS U....
हर तरफ आग है दामन को बचाएं कैसे,
बोझ होता जो ग़मों का तो उठा भी लेते
जिंदगी ही बोझ है तो इस बोझ को उठाएं कैसे....
I MISS U....
No comments:
Post a Comment